आखिर क्यों आया यह विनाशकारी बर्फीला तूफान? एक ऐसा रहस्य जिसे वैज्ञानिक भी अब तक नहीं सुलझा पाए…

अमेरिका में ‘बर्फ का कहर’: Polar Vortex की वापसी और लाखों जिंदगियों पर मंडराता खतरा! क्या ट्रम्प के फैसले से बिगड़ेगा मौसम का मिजाज?

अमेरिका में टेक्सस से लेकर न्यू इंग्लैंड तक लाखों लोग एक भयानक बर्फीले तूफान (Snow and Ice Storm) के साये में हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि यह सिर्फ बर्फबारी नहीं, बल्कि एक जानलेवा Polar Vortex (ध्रुवीय भंवर) है, जो तापमान को खतरनाक स्तर तक नीचे गिरा सकता है।

क्यों खतरनाक है यह तूफान?
यह वही ‘Polar Vortex’ है जिसने 2021 में टेक्सस में तबाही मचाई थी। उस समय कड़ाके की ठंड से पावर ग्रिड फेल हो गए थे और 246 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस बार भी खतरा बड़ा है क्योंकि बर्फीली हवाएं कई दिनों तक जमी रहेंगी। FEMA ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे अपनी गाड़ियों में पेट्रोल फुल रखें, जनरेटर चेक करें और फ्लैशलाइट के लिए एक्स्ट्रा बैटरियां तैयार रखें।

क्लाइमेट चेंज या कुछ और?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, आमतौर पर Jet Stream (हवा की एक तेज धारा) ठंडी हवा को पृथ्वी के ऊपरी हिस्से (Polar region) में कैद रखती है। लेकिन अब यह कमजोर और टेढ़ी-मेढ़ी हो रही है, जिससे आर्कटिक की जमा देने वाली हवाएं दक्षिण की तरफ, यानी अमेरिका के रिहायशी इलाकों में घुस रही हैं। वैज्ञानिक अभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ग्लोबल वार्मिंग ही जेट स्ट्रीम को इतना अस्थिर बना रही है।

ट्रम्प सरकार के फैसले ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता
इस कुदरती आफत के बीच, एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा विज्ञान और क्लाइमेट रिसर्च के बजट में की गई भारी कटौती ने मौसम वैज्ञानिकों के हाथ बांध दिए हैं।

  • बजट में कटौती: ट्रम्प सरकार और DOGE (Department of Government Efficiency) ने NOAA और NASA जैसे अहम संस्थानों के बजट और स्टाफ में कमी की है।
  • खतरे में भविष्यवाणी: वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर रिसर्च के लिए पैसा नहीं मिला, तो भविष्य में ऐसे जानलेवा तूफानों की सटीक भविष्यवाणी करना नामुमकिन हो जाएगा। सटीक जानकारी के बिना आपदा प्रबंधन (Disaster Management) फेल हो सकता है, जैसा कि हम पहले देख चुके हैं।
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यह तूफान न सिर्फ अमेरिका के मौसम का इम्तेहान ले रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि क्लाइमेट चेंज और विज्ञान की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है।

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