चागोस डील पर ट्रंप का यू-टर्न: जिसे बताया था ‘ऐतिहासिक’, अब उसे ही कहा ‘महामूर्खता’! स्टारमर को लगा बड़ा झटका
क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी ही बात से पलट गए हैं? वैश्विक राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। चागोस द्वीप समूह (Chagos Islands) को मॉरीशस को सौंपने की ब्रिटेन की जिस योजना की ट्रंप प्रशासन ने कुछ महीने पहले तारीफों के पुल बांधे थे, अब उसी फैसले को ट्रंप ने "बड़ी मूर्खता" (An act of great stupidity) करार दिया है।
क्या हुआ था पहले?
मई 2025 में, जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस डील पर हस्ताक्षर किए थे, तब उन्होंने गर्व से दुनिया को बताया था कि राष्ट्रपति ट्रंप उनके साथ हैं। स्टारमर ने दावा किया था कि ट्रंप और अन्य सहयोगियों ने इस समझौते का स्वागत किया है क्योंकि वे डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) बेस की रणनीतिक अहमियत को समझते हैं।
इतना ही नहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने उस वक्त एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि ट्रंप ने इस "स्मारक उपलब्धि" (Monumental achievement) के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है। रुबियो ने इसे अमेरिका-ब्रिटेन के अटूट रिश्तों की मिसाल बताया था।
ओवल ऑफिस में क्या बात हुई थी?
फरवरी में जब स्टारमर व्हाइट हाउस गए थे, तब ट्रंप का रुख बिल्कुल अलग था। डिएगो गार्सिया को 99 साल (प्लस 40 साल का विकल्प) की लीज पर लेने की योजना पर ट्रंप ने कहा था, "यह एक बहुत लंबी और मजबूत लीज है… मुझे लगता है कि हम इसके साथ जाने के लिए तैयार होंगे।"
अचानक क्यों बदला ट्रंप का मूड?
ट्रंप के इस ताजे बयान ने लंदन से लेकर वाशिंगटन तक खलबली मचा दी है। जो डील कल तक "शांति और सुरक्षा" के लिए जरूरी बताई जा रही थी, आज ट्रंप की नजर में वह ब्रिटेन की बेवकूफी बन गई है। क्या अमेरिका अब इस रणनीतिक द्वीप पर अपनी पकड़ खोने से डर रहा है? या यह ट्रंप की कोई नई कूटनीतिक चाल है?
इस यू-टर्न ने कीर स्टारमर की सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। डिएगो गार्सिया बेस का भविष्य और पश्चिमी देशों की सुरक्षा नीति अब एक बार फिर सवालों के घेरे में है।