पोप की नई चिट्ठी का सच: पादरियों से आखिर वो कौन सी मांग की गई है जो चर्च की नींव हिला सकती है?

पोप का बड़ा खुलासा: पादरियों के जीवन में आए ‘संकट’ पर तोड़ी चुप्पी, चर्च में बड़े बदलाव के संकेत!

क्या कैथोलिक चर्च में सब कुछ ठीक नहीं है? वेटिकन से एक बड़ी खबर सामने आई है। पोप लियो XIV (Pope Leo XIV) ने पुजारियों (Priests) की ट्रेनिंग और जीवन को लेकर एक नया पत्र जारी किया है, जिसने धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है। इस पत्र में उन्होंने चर्च के भीतर चल रहे यौन शोषण के मामलों और पादरियों द्वारा सेवा छोड़ने की घटनाओं पर खुलकर बात की है।

शर्मिंदगी और सुधार की जरुरत
पोप लियो ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दशकों में पादरियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार (Abuse) के मामलों ने चर्च को शर्मिंदा किया है और लोगों का भरोसा तोड़ा है। अपने नए पत्र "Una fedeltà che genera future" में उन्होंने कहा कि अब सिर्फ क़ानून बनाने से काम नहीं चलेगा। पादरियों को ‘मानवीय परिपक्वता’ (Human Maturity) और सख्त आध्यात्मिक ट्रेनिंग की जरुरत है, ताकि वे अपनी पवित्रता बनाए रख सकें।

"कोई भी पादरी अकेला नहीं है"
क्या पादरी अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं? पोप ने चेतावनी दी है कि अकेलापन एक बड़ा खतरा है जो पादरियों को अंदर से तोड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि "कोई भी चरवाहा (Shepherd) अकेला नहीं होता।" पादरियों को एक-दूसरे के साथ भाईचारे में रहना चाहिए और अमीर-गरीब पैरिश (Parish) के बीच भेदभाव को खत्म करना चाहिए।

पावर नहीं, सेवा है असली मकसद
पोप ने साफ कर दिया कि अब "Exclusive Leadership" यानी अकेले राज करने का मॉडल नहीं चलेगा। पादरियों को आम लोगों (Lay faithful) और डीकन्स के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने सोशल मीडिया की झूठी चमक-धमक और "दिखावे की सेवा" से बचने की भी सलाह दी है।

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यह पत्र वेटिकन II काउंसिल की 60वीं वर्षगांठ पर जारी किया गया है, जो चर्च के भविष्य के लिए एक नया रोडमैप तैयार करता है।

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