रक्षा सौदा: भारत का ₹3.6 लाख करोड़ का रक्षा उछाल - S-400 मिसाइलें और राफेल जेट्स!
भारत अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने ₹3.6 लाख करोड़ के रक्षा सौदे को मंजूरी दी है, जिसमें 288 S-400 मिसाइलें और 114 राफेल लड़ाकू जेट शामिल हैं।
टेबल ऑफ़ कंटेंट
- संक्षिप्त जवाब
- परिचय
- S-400 मिसाइल सौदा
- राफेल लड़ाकू जेट सौदा
- ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका
- मेक इन इंडिया को बढ़ावा
- रक्षा बजट का अवलोकन
- मुख्य बातें
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- संबंधित खबरें
- निष्कर्ष
संक्षिप्त जवाब {#answer-summary}
भारत ने अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने लगभग ₹3.6 लाख करोड़ के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें रूस से 288 S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू जेट शामिल हैं। यह फैसला भारतीय वायु सेना को और भी शक्तिशाली बना देगा.
परिचय {#introduction}
भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक में लगभग ₹3.6 लाख करोड़ के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इस मंजूरी में रूस से 288 S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद और फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों का अधिग्रहण शामिल है. यह निर्णय भारत की सैन्य तैयारियों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगा और देश की सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करेगा.
S-400 मिसाइल सौदा {#s-400-missile-deal}
भारत रूस से ₹10,000 करोड़ की अनुमानित लागत पर 288 S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद करेगा. इस अधिग्रहण का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपयोग किए गए मिसाइल भंडार को फिर से भरना है और भारत की लंबी और कम दूरी की वायु रक्षा तैयारियों को बढ़ाना है. इस सौदे में भारतीय वायु सेना के लिए 120 कम दूरी की मिसाइलें और 168 लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल हैं. वितरण में तेजी लाने के लिए खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया (FTP) के माध्यम से की जाएगी. भारत को इस साल पहले से हस्ताक्षरित अनुबंध के तहत दो अतिरिक्त S-400 सिस्टम मिलने वाले हैं.
भारतीय वायु सेना हवाई खतरों से बहुस्तरीय सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए रूसी पैंटिर कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के साथ पांच और S-400 सिस्टम का प्रस्ताव कर रही है. S-400 और पैंटिर सिस्टम को दो-स्तरीय रक्षा वास्तुकला में एकीकृत किया जा सकता है जो विभिन्न श्रेणियों में विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को रोकने में सक्षम है. S-400 प्रणाली में 40 किमी, 150 किमी, 200 किमी और 400 किमी की दूरी वाली मिसाइलें हैं, जो इसे एक बहुस्तरीय रक्षा कवच बनाती हैं.
राफेल लड़ाकू जेट सौदा {#rafale-fighter-jet-deal}
भारत ने अपने वायु प्रभुत्व को मजबूत करने के लिए 114 और राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है. रक्षा अधिग्रहण परिषद ने राजनाथ सिंह के नेतृत्व में इस जरूरत की स्वीकृति को मंजूरी दी, जिससे डसॉल्ट एविएशन के साथ औपचारिक बातचीत का मार्ग प्रशस्त हो गया. इन 114 विमानों में से 90 का निर्माण भारत में निजी उद्योग के साथ साझेदारी में किया जाएगा, जिससे 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा मिलेगा. ऑपरेशन सिंदूर में राफेल के रणनीतिक महत्व को देखते हुए यह विस्तार किया जा रहा है. पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और स्क्वाड्रन की कमी को देखते हुए, भारतीय वायु सेना इसे महत्वपूर्ण सुदृढीकरण के रूप में देखती है.
ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका {#operation-sindoor-role}
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 प्रणाली की प्रभावशीलता को देखा गया था. भारतीय सशस्त्र बलों ने इस प्रणाली का उपयोग करके कई पाकिस्तानी हवाई हमलों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया, जिसमें लड़ाकू जेट, निगरानी विमान और कई लड़ाकू ड्रोन शामिल थे. S-400 प्रणाली की लंबी दूरी की क्षमता ने संवेदनशील क्षेत्रों के साथ हवाई गतिविधि को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर 314 किलोमीटर तक मार की.
मेक इन इंडिया को बढ़ावा {#make-in-india-boost}
राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे में 90 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिसमें लगभग 50% स्वदेशी सामग्री का उपयोग होगा. यह 'मेक इन इंडिया' पहल को महत्वपूर्ण बढ़ावा देगा और घरेलू रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा. सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, और यह सौदा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
रक्षा बजट का अवलोकन {#defence-budget-overview}
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल रक्षा बजट (रक्षा पेंशन सहित) ₹6,21,940.85 करोड़ है. यह राशि भारत सरकार के कुल व्यय का 12.9% है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.89% है. पूंजीगत व्यय के लिए बजटीय आवंटन ₹1,72,000 करोड़ है, जो 2023-24 के संशोधित अनुमान से 9.40% अधिक है. सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है.