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शिक्षा न्यूज़ | 2/14/2026

डिजिटल सुरक्षा: बच्चों को Online Grooming से कैसे बचाएं? | Digital Safety

डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन ग्रूमिंग के बारे में जागरूकता शिक्षा आज के समय में बहुत ज़रूरी है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्कूलों और माता-पिता दोनों को मिलकर काम करना होगा। आजकल बच्चे बहुत कम उम्र से ही इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऑनलाइन गेम्स, सोशल मीडिया और पढ़ाई के लिए इंटरनेट ज़रूरी हो गय...

डिजिटल सुरक्षा: बच्चों को Online Grooming से कैसे बचाएं? | Digital Safety

टेबल ऑफ़ कंटेंट

  1. जवाब संक्षेप
  2. परिचय
  3. ऑनलाइन ग्रूमिंग क्या है?
  4. भारत में ऑनलाइन ग्रूमिंग के खतरे
  5. शिक्षा में डिजिटल सुरक्षा जागरूकता का महत्व
  6. स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम कैसे लागू करें
  7. माता-पिता के लिए सुझाव: बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के उपाय
  8. डिजिटल सुरक्षा के लिए सरकारी पहल
  9. मुख्य बातें
  10. FAQs
  11. संबंधित खबरें
  12. निष्कर्ष

जवाब संक्षेप {#answer-summary}

डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन ग्रूमिंग के बारे में जागरूकता शिक्षा आज के समय में बहुत ज़रूरी है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्कूलों और माता-पिता दोनों को मिलकर काम करना होगा।

परिचय {#introduction}

आजकल बच्चे बहुत कम उम्र से ही इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऑनलाइन गेम्स, सोशल मीडिया और पढ़ाई के लिए इंटरनेट ज़रूरी हो गया है, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन खतरे भी बढ़ गए हैं। ऑनलाइन ग्रूमिंग इनमें से एक गंभीर खतरा है, जिसमें अपराधी बच्चों को ऑनलाइन दोस्ती करके उन्हें गलत काम करने के लिए उकसाते हैं। इसलिए, बच्चों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में सिखाना और उन्हें ऑनलाइन ग्रूमिंग से बचाने के लिए जागरूक करना बहुत ज़रूरी है।

ऑनलाइन ग्रूमिंग क्या है? {#online-grooming-kya-hai}

ऑनलाइन ग्रूमिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक वयस्क व्यक्ति इंटरनेट के माध्यम से बच्चे से दोस्ती करता है, उसका विश्वास जीतता है और फिर उसे यौन शोषण या अन्य प्रकार के शोषण के लिए तैयार करता है। ग्रूमर अक्सर सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स या चैट रूम का इस्तेमाल करते हैं ताकि वे बच्चों तक पहुंच सकें। वे झूठी पहचान बनाते हैं और बच्चों को अपनी बातों में फंसाते हैं।

भारत में ऑनलाइन ग्रूमिंग के खतरे {#bharat-mein-online-grooming-ke-khatre}

भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, खासकर बच्चों और किशोरों में। इससे ऑनलाइन ग्रूमिंग का खतरा भी बढ़ गया है। कई मामले सामने आए हैं जिनमें बच्चों को ऑनलाइन ग्रूमिंग का शिकार बनाया गया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2024 में साइबर अपराधों में 15% की वृद्धि हुई, जिसमें बच्चों के खिलाफ अपराध भी शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि इस समस्या को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है।

शिक्षा में डिजिटल सुरक्षा जागरूकता का महत्व {#shiksha-mein-digital-suraksha-jagrukta-ka-mahatva}

शिक्षा में डिजिटल सुरक्षा जागरूकता का बहुत महत्व है। बच्चों को यह सिखाना ज़रूरी है कि वे ऑनलाइन दुनिया में कैसे सुरक्षित रहें। उन्हें यह जानना चाहिए कि उन्हें किस तरह की जानकारी ऑनलाइन साझा नहीं करनी चाहिए, उन्हें अजनबियों से कैसे बात करनी चाहिए और अगर उन्हें कोई ऑनलाइन खतरा महसूस होता है तो उन्हें क्या करना चाहिए।

डिजिटल सुरक्षा जागरूकता से बच्चों को निम्नलिखित लाभ होते हैं:

स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम कैसे लागू करें {#schoolon-mein-digital-suraksha-kaise-lagu-kare}

स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम लागू करना बच्चों को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। स्कूलों को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

माता-पिता के लिए सुझाव: बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के उपाय {#mata-pita-ke-liye-sujhav}

माता-पिता अपने बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:

डिजिटल सुरक्षा के लिए सरकारी पहल {#digital-suraksha-ke-liye-sarkari-pahale}

भारत सरकार ने डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए कई पहल शुरू की हैं। इनमें से कुछ पहलें इस प्रकार हैं:

इन पहलों के अलावा, सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल सुरक्षा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए भी कदम उठाए हैं। सरकार यह भी सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) और सोशल मीडिया कंपनियां ऑनलाइन सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार हैं।

मुख्य बातें {#key-takeaways}

FAQs {#faqs}

प्रश्न 1: ऑनलाइन ग्रूमिंग क्या है? उत्तर: ऑनलाइन ग्रूमिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक वयस्क व्यक्ति इंटरनेट के माध्यम से बच्चे से दोस्ती करता है, उसका विश्वास जीतता है और फिर उसे यौन शोषण या अन्य प्रकार के शोषण के लिए तैयार करता है।

प्रश्न 2: मैं अपने बच्चों को ऑनलाइन ग्रूमिंग से कैसे बचा सकता हूँ? उत्तर: आप अपने बच्चों से इंटरनेट के इस्तेमाल के बारे में बात करके, उनके ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखकर, उन्हें ऑनलाइन खतरों के बारे में बताकर और उनके साथ एक मजबूत रिश्ता बनाकर उन्हें ऑनलाइन ग्रूमिंग से बचा सकते हैं।

प्रश्न 3: स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम क्यों ज़रूरी हैं? उत्तर: स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम बच्चों को ऑनलाइन खतरों को पहचानने, अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने, ऑनलाइन उत्पीड़न और साइबरबुलिंग से खुद को बचाने और सुरक्षित और ज़िम्मेदारी से इंटरनेट का इस्तेमाल करने में मदद करते हैं।

प्रश्न 4: सरकार डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही है? उत्तर: सरकार ने साइबर सुरक्षित भारत, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा युक्तियाँ जैसी कई पहलें शुरू की हैं।

प्रश्न 5: अगर मुझे लगता है कि मेरा बच्चा ऑनलाइन ग्रूमिंग का शिकार हो रहा है तो मुझे क्या करना चाहिए? उत्तर: अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा ऑनलाइन ग्रूमिंग का शिकार हो रहा है, तो आपको तुरंत पुलिस को रिपोर्ट करनी चाहिए। आप चाइल्डलाइन इंडिया हेल्पलाइन नंबर 1098 पर भी कॉल कर सकते हैं।

संबंधित खबरें {#related-news}

निष्कर्ष {#conclusion}

डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन ग्रूमिंग के बारे में जागरूकता आज के समय में बहुत ज़रूरी है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्कूलों, माता-पिता और सरकार को मिलकर काम करना होगा। बच्चों को ऑनलाइन खतरों के बारे में शिक्षित करके और उन्हें सुरक्षित रहने के लिए ज़रूरी कौशल प्रदान करके, हम उन्हें ऑनलाइन ग्रूमिंग का शिकार होने से बचा सकते हैं। बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए आज ही कदम उठाएं।