ICE वारंट मेमो: आखिर क्या छिपा है उस नीति में जो छीन सकती है अमेरिका का एक मौलिक अधिकार?

सावधान! अब बिना वारंट आपके घर में घुस सकती है पुलिस? ट्रम्प प्रशासन के इस सीक्रेट मेमो ने मचाया हड़कंप!

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि पुलिस बिना जज की इजाजत और बिना सही वारंट के आपके घर का दरवाजा तोड़कर अंदर आ जाए? यह किसी फिल्म का सीन नहीं, बल्कि अमेरिका की नई हकीकत हो सकती है। एक लीक हुए "सीक्रेट मेमो" ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानून के जानकारों के होश उड़ा दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
ट्रम्प प्रशासन के तहत ‘इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट’ (ICE) को अब किसी के घर में घुसने के लिए कोर्ट के ‘ज्यूडिशियल वारंट’ (Judicial Warrant) की जरूरत नहीं होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को अब केवल ‘एडमिनिस्ट्रेटिव वारंट’ के जरिए निजी संपत्तियों में घुसने और तलाशी लेने की छूट दे दी गई है।

खतरे की घंटी क्यों?
सबसे डराने वाली बात यह है कि ‘ज्यूडिशियल वारंट’ पर एक निष्पक्ष जज के हस्ताक्षर होते हैं, जबकि ‘एडमिनिस्ट्रेटिव वारंट’ खुद इमीग्रेशन अधिकारी ही साइन कर लेते हैं। आसान भाषा में समझें तो, "गिरफ्तार करने वाला ही वारंट लिख रहा है।"

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के प्रोफेसर मार्क ग्रैबर ने तंज कसते हुए कहा, "हमें लगता था कि बिल ऑफ राइट्स में 10 संशोधन हैं, लेकिन इस मेमो के बाद लगता है अब सिर्फ 9 ही बचे हैं।" यह सीधा अमेरिका के चौथे संशोधन (Fourth Amendment) पर हमला है, जो नागरिकों को गैर-कानूनी तलाशी से बचाता है।

चुपके से लागू हुआ आदेश
मई 2025 में जारी हुए इस आदेश को इतना गुप्त रखा गया था कि खुद ICE के कई अधिकारियों को भी इसके बारे में पता नहीं था। व्हिसलब्लोअर द्वारा भांडाफोड़ करने के बाद यह बात सामने आई। आलोचकों का कहना है कि यह "रूबिकॉन पार करने" जैसा है, यानी प्रशासन ने कानून की सारी हदें पार कर दी हैं।

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जहां एक तरफ होमलैंड सिक्योरिटी का कहना है कि यह केवल उन लोगों के लिए है जिनके खिलाफ निर्वासन (Deportation) का आदेश है, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल प्रवासियों बल्कि आम नागरिकों की निजता (Privacy) और सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

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