क्यूबा: स्वर्ग से नर्क तक! आखिर क्यों 10 लाख लोग देश छोड़कर भाग गए? जानिए असली सच
क्या आपको 2014 का वह दौर याद है? जब ओबामा और क्यूबा के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ था। रोलिंग स्टोन्स हवाना में गा रहे थे और पूरी दुनिया को लगा था कि क्यूबा का भविष्य अब चमकने वाला है। लेकिन आज, वह सपना एक डरावने ‘दुस्वप्न’ में बदल चुका है।
क्यूबा में क्या हो रहा है? रोंगटे खड़े कर देने वाली हकीकत:
आज क्यूबा सोवियत संघ के पतन के बाद अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। हालात इतने खराब हैं कि पिछले 5 सालों में 10 लाख से ज्यादा लोग (देश की 10% आबादी) अपना घर छोड़कर अमेरिका भाग चुके हैं।
- अंधेरे में डूबा देश: वहां का बिजली ग्रिड पूरी तरह फेल हो चुका है। लोग हफ्तों तक अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
- भूखमरी और बीमारी: खाने की भारी कमी है। अक्टूबर में आए ‘हरिकेन मेलिसा’ ने 90,000 घर और खेत तबाह कर दिए। ऊपर से अब डेंगू और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों ने महामारी का रूप ले लिया है।
- अर्थव्यवस्था ध्वस्त: 2020 के बाद से GDP 11% गिर चुकी है। महंगाई इतनी है कि पैसे की कोई कीमत नहीं बची।
किसकी गलती? अमेरिका या खुद क्यूबा?
डोनल्ड ट्रम्प ने 2016 में ओबामा की डील रद्द कर दी और कड़े प्रतिबंध लगा दिए। उन्होंने क्यूबा को ‘आतंकवाद का प्रायोजक’ घोषित कर दिया, जिससे पर्यटन ठप हो गया। लेकिन असली मुजरिम कौन है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ अमेरिका की गलती नहीं है। क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार और राष्ट्रपति डियाज-कानेल (Díaz-Canel) सुधार करने में पूरी तरह फेल रहे। उन्होंने प्राइवेट बिजनेस को मौका नहीं दिया और अपनी पुरानी और जंग लगी नीतियों से चिपके रहे। सरकार ने सही समय पर बदलाव नहीं किया, और उसका नतीजा आज जनता भुगत रही है।
क्या क्यूबा डूब रहा है?
राउल कास्त्रो ने 2010 में कहा था, "हम सुधार करेंगे या डूब जाएंगे।" आज ऐसा लग रहा है कि क्यूबा सच में डूब रहा है। वेनेजुएला से मिलने वाली मदद बंद होने की कगार पर है और रूस-चीन भी इस डूबते जहाज को बचाने में कतरा रहे हैं।
अगर क्यूबा ने जल्द ही अपनी अर्थव्यवस्था को नहीं खोला और तानाशाही नहीं छोड़ी, तो यह खूबसूरत देश पूरी तरह बिखर जाएगा। जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, और उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आ रही।