क्या एलियंस हमारी सोच से भी करीब हैं? वैज्ञानिकों का नया दावा जानकर उड़ जाएंगे होश!
अब तक हम सोचते थे कि जीवन सिर्फ पृथ्वी (Earth) जैसे ‘परफेक्ट’ तापमान वाले ग्रहों पर ही हो सकता है। लेकिन एक नई रिसर्च ने इस पुरानी थ्योरी को पूरी तरह पलट दिया है। क्या ब्रह्मांड के ‘अंधेरे’ और ‘खतरनाक’ कोनों में जीवन पनप रहा है? जवाब आपको हैरान कर देगा।
गोल्डीलॉक्स ज़ोन का नियम टूटा?
दशकों से खगोलशास्त्री (Astronomers) केवल उन ग्रहों पर जीवन तलाश रहे थे जो अपने तारे से एक निश्चित दूरी पर हों—न ज्यादा गर्म, न ज्यादा ठंडे। इसे "Habitable Zone" कहा जाता है। लेकिन हिब्रू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अमरी वांडेल की नई स्टडी कहती है कि हमने बहुत बड़ी गलती की है।
‘डार्क साइड’ का रहस्य (The Dark Side Mystery)
स्टडी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा उन ग्रहों के बारे में है जो "Tidally Locked" हैं। यानी, इनका एक हिस्सा हमेशा तारे की तरफ (दिन) और दूसरा हमेशा अंधेरे (रात) में रहता है।
- पहले माना जाता था कि इनका ‘रात वाला हिस्सा’ इतना ठंडा होगा कि वहां जीवन नहीं हो सकता।
- प्रोफेसर वांडेल का मॉडल बताता है कि दिन वाले हिस्से की गर्मी हवाओं के जरिए रात वाले हिस्से तक पहुंच सकती है।
- इसका मतलब है कि हमेशा अंधेरे में रहने वाले हिस्से में भी लिक्विड वॉटर (पानी) मौजूद हो सकता है!
बर्फ के नीचे छिपी दुनिया
सिर्फ इतना ही नहीं, जो ग्रह अपने तारे से बहुत दूर हैं और बाहर से बर्फ के गोले जैसे दिखते हैं, उनके लिए भी खुशखबरी है। रिसर्च के अनुसार, इन ग्रहों की मोटी बर्फ की परत के नीचे विशाल झीलें (Subglacial lakes) छिपी हो सकती हैं, जहां जीवन मजे से पनप रहा हो सकता है।
जेम्स वेब ने भी दिए संकेत
यह नई थ्योरी James Webb Space Telescope की हालिया खोजों से मेल खाती है, जिसने अजीबोगरीब ग्रहों पर भी पानी के संकेत देखे हैं।
निष्कर्ष:
यह स्टडी बताती है कि ब्रह्मांड हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा ‘मेहमाननवाज़’ हो सकता है। जिन ग्रहों को हम ‘बेकार’ समझकर छोड़ रहे थे, शायद एलियंस वहीं बैठकर हमें देख रहे हों! वैज्ञानिकों के लिए अब एलियंस को ढूंढने का दायरा पहले से कहीं बड़ा हो गया है।