इतिहास के पन्नों से चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स की वो चेतावनी: क्या खतरे में है न्यायपालिका की आज़ादी?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की चेतावनी! क्या ट्रम्प के लिए है यह इशारा? जानिए रिपोर्ट का सच

अमेरिका में न्यायपालिका और राजनीति के बीच चल रही खींचतान के बीच, चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपनी सालाना रिपोर्ट में एक बड़ा बयान दिया है। क्या यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक गुप्त संदेश है? आइए जानते हैं इस रिपोर्ट के अंदर की पूरी कहानी।

संविधान और कोर्ट की आजादी पर जोर
बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में जॉन रॉबर्ट्स ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को "काउंटर-मेजॉरिटेरियन चेक" (सत्ता पक्ष के खिलाफ संतुलन) बताया। उन्होंने अमेरिकियों से अपील की कि वे पक्षपाती राजनीति के शोर के बीच संविधान पर अपना भरोसा बनाए रखें। रॉबर्ट्स ने याद दिलाया कि अमेरिका के संस्थापकों ने कोर्ट्स को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखा था और "यह व्यवस्था 236 वर्षों से देश की अच्छी सेवा कर रही है।"

ट्रम्प का नाम नहीं, लेकिन इशारा साफ?
हैरानी की बात यह है कि रॉबर्ट्स ने राष्ट्रपति ट्रम्प या व्हाइट हाउस के साथ चल रहे टकराव का सीधा जिक्र नहीं किया। जबकि ट्रम्प ने कई बार जजों के फैसलों पर सवाल उठाए हैं और महाभियोग (Impeachment) की मांग की है।

हालांकि, आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन की 80% से अधिक आपातकालीन अपीलों (Shadow Docket) में उनका साथ दिया है। इसमें विदेशी सहायता रोकने से लेकर इमिग्रेशन से जुड़े कड़े फैसले शामिल हैं। लेकिन हाल ही में कोर्ट ने ट्रम्प को शिकागो में नेशनल गार्ड तैनात करने से रोक भी दिया था।

इतिहास के जरिए भविष्य को संदेश
रॉर्ट्स ने 1804 में जस्टिस सैमुअल चेस के महाभियोग का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उस समय भी जजों को उनके फैसलों के कारण हटाने की कोशिश नाकाम रही थी। जानकारों का मानना है कि यह ट्रम्प की जजों को हटाने वाली धमकियों का एक "ऐतिहासिक जवाब" है।

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आगे क्या होगा?
2026 में सुप्रीम कोर्ट के सामने जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) और ग्लोबल टैरिफ जैसे बड़े मुद्दे आने वाले हैं। ऐसे में चीफ जस्टिस का यह बयान कि "जजों को निडर होकर काम करना चाहिए," आने वाले तूफानी फैसलों का संकेत दे रहा है।

रिपोर्ट के अंत में रॉबर्ट्स ने पूर्व राष्ट्रपति केल्विन कूलिज को कोट करते हुए लिखा: "तब भी सच था, अब भी सच है।" यानी संविधान ही सर्वोपरि है।

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