Sweden vs Finland: सांसे रोक देने वाला मैच! 8वें राउंड के शूटआउट में स्वीडन की ऐतिहासिक जीत, फाइनल में बनाई जगह!
क्या आपने कभी ऐसा मैच देखा है जहां रोमांच अपनी सारी हदें पार कर दे? स्वीडन और फिनलैंड के बीच खेले गए हॉकी मैच में कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने दर्शकों की धड़कनें बढ़ा दीं। स्वीडन ने फिनलैंड को रोमांचक शूटआउट में 4-3 से हराकर गोल्ड-मेडल गेम में अपनी जगह पक्की कर ली है।
मैच का सबसे बड़ा ‘हीरो’: एंटोन फ्रोंडेल
जीत का सेहरा एंटोन फ्रोंडेल (Anton Frondell) के सिर बंधा, जिन्होंने शूटआउट के 8वें राउंड में निर्णायक गोल दागा। अपनी जीत पर फ्रोंडेल ने कहा, "मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया था (I blacked out)। यह एक अद्भुत अहसास था। मेरे पास तीन मौके थे, और खुशी है कि आखिरी वाला गोल में बदल गया।"
क्यों खास है यह जीत?
यह जीत स्वीडन के लिए सिर्फ एक मैच नहीं था:
- स्वीडन 2012 के बाद अपने पहले गोल्ड मेडल की तलाश में है।
- यह टीम पिछले तीन सालों में दूसरी बार चैंपियनशिप गेम में पहुंची है।
- फिनलैंड के खिलाफ पिछले 10 मैच बेहद कांटे के रहे हैं, जिनका फैसला सिर्फ एक गोल के अंतर से हुआ है।
मैच का हाई-वोल्टेज ड्रामा
मैच उतार-चढ़ाव से भरा था। स्वीडन के लिए इवर स्टाइनबर्ग और एडी जेनबोर्ग ने शानदार खेल दिखाया।
- लिनस एरिक्सन ने मैच के 36वें सेकंड में ही स्वीडन को बढ़त दिला दी।
- फिनलैंड ने भी हार नहीं मानी और स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया।
- अंत में मामला शूटआउट तक पहुंचा, जहां जैक बर्गलंड और फिर फ्रोंडेल ने स्वीडन की नैया पार लगाई।
फिनलैंड के गोलकीपर का छलका दर्द
फिनलैंड के गोलकीपर पेटेरी रिम्पिनेन (Petteri Rimpinen) ने 36 शानदार बचाव किए, लेकिन हार के बाद वे टूट गए। उन्होंने कहा, "मैं अभी बहुत दुखी हूं। यह दर्द मुझे जिंदगी भर चुभता रहेगा। हमने अंत तक लड़ाई लड़ी, लेकिन शायद एक और सेव की जरूरत थी।"
अब सबकी निगाहें फाइनल मुकाबले पर हैं। क्या स्वीडन 2012 का सूखा खत्म कर पाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा!