Coco Gauff Australian Open: क्या यह ‘खतरनाक’ आदत कोको का सपना तोड़ देगी? देखिए उनके ‘Flamingo Shot’ का कड़वा सच!
मेलबर्न: क्या कोको गॉफ (Coco Gauff) ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतने के लिए तैयार हैं? दुनिया की नंबर 3 खिलाड़ी ने पहले दौर में जीत जरूर दर्ज की, लेकिन कोर्ट पर कुछ ऐसा हुआ जिसने टेनिस दिग्गजों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
कोको की ‘फ्लेमिंगो’ गलती
मैच के दौरान गॉफ बार-बार अपने पिछले पैर (Back foot) पर वजन डालकर शॉट मारती दिखीं। इसे टेनिस की दुनिया में ‘फ्लेमिंगो फोरहैंड’ कहा जा रहा है। यह एक ऐसा शॉट है जो देखने में तो एथलेटिक लगता है, लेकिन असल में यह कोको की सबसे बड़ी कमजोरी का संकेत है। जब वह पीछे हटकर खेलती हैं, तो वह ‘डिफेंसिव’ हो जाती हैं, जबकि चैंपियन बनने के लिए उन्हें ‘एग्रेसिव’ होने की जरूरत है।
खतरे की घंटी: 31 अनफोर्स्ड एरर्स
कामिला राखीमोवा के खिलाफ 6-2, 6-3 की जीत स्कोरबोर्ड पर अच्छी लग सकती है, लेकिन आंकड़े डराने वाले हैं। कोको ने मैच में 31 अनफोर्स्ड एरर्स किए और 7 डबल फॉल्ट्स मारे। अगर अगले दौर में उनका मुकाबला किसी टॉप खिलाड़ी से हुआ, तो यह ‘फ्लेमिंगो तकनीक’ उन्हें भारी पड़ सकती है।
क्या गैविन मैकमिलन बदल पाएंगे गेम?
कोको ने अपनी इस कमजोरी को सुधारने के लिए बायोमैकेनिक्स कोच गैविन मैकमिलन को अपनी टीम में शामिल किया है। मैकमिलन का काम कोको की सर्विस और फोरहैंड को आक्रामक बनाना है। कोको का लक्ष्य "डबल-डिजिट" ग्रैंड स्लैम जीतना है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी पुरानी आदतें छोड़नी होंगी।
फैंस के लिए बड़ा सवाल
कोको अभी सिर्फ 21 साल की हैं और उनमें अपार क्षमता है। लेकिन क्या वह इस टूर्नामेंट के बीच में अपने खेल को बदल पाएंगी? या फिर डिफेंसिव खेल उन्हें एक बार फिर खिताबी रेस से बाहर कर देगा?
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