US Fed Meeting: ब्याज दरें घटने के बाद भी क्यों डरे हुए हैं एक्सपर्ट्स? ट्रम्प कनेक्शन और महंगाई ने उड़ाई नींद!
वाशिंगटन: क्या अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सब कुछ ठीक है? फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ताज़ा मीटिंग के मिनट्स ने बाज़ारों में खलबली मचा दी है। ब्याज दरों में कटौती तो हुई, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे जो बहस हुई, उसने निवेशकों के कान खड़े कर दिए हैं।
मीटिंग में अभूतपूर्व ‘घमासान’
मंगलवार को जारी मिनट्स के मुताबिक, ब्याज दरों को 0.25% घटाकर 3.5%-3.75% की रेंज में लाने का फैसला इतना आसान नहीं था। वोटिंग 9-3 रही, जो 2019 के बाद सबसे ज्यादा विरोध (dissent) दर्शाता है। कई अधिकारी रेट कट के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि उन्हें महंगाई (Inflation) के फिर से सिर उठाने का डर है।
ट्रम्प की टेरिफ नीति पर बड़ी चेतावनी
मीटिंग में एक बड़ा मुद्दा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टेरिफ नीतियां भी रहीं। फेड अधिकारियों ने माना कि ट्रम्प के टेरिफ से महंगाई बढ़ रही है, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि यह असर 2026 तक कम हो जाएगा। लेकिन इस अनिश्चितता ने फेड को भविष्य के फैसलों पर ‘सावधान’ कर दिया है।
क्या अब रुक जाएगी कटौती?
मिनट्स साफ़ इशारा करते हैं कि फेड अब ‘पॉज़’ (Pause) बटन दबा सकता है। कई सदस्यों का मानना है कि अगली कटौती से पहले इंतज़ार करना चाहिए। हालांकि, ‘डॉट प्लॉट’ 2026 और 2027 में एक-एक और कटौती का संकेत दे रहा है।
चुपके से शुरू हुआ ‘नोट छापने’ का काम?
सबसे चौंकाने वाला फैसला बॉन्ड-बाइंग प्रोग्राम (Quantitative Easing) को फिर से शुरू करना है। फेड अब शॉर्ट-टर्म फंडिंग बाजार को शांत रखने के लिए हर महीने $40 बिलियन के ट्रेजरी बिल खरीदेगा।
निष्कर्ष:
GDP 4.3% की रफ़्तार से बढ़ रही है, लेकिन महंगाई और लेबर मार्केट के बीच फंसा फेड अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। क्या ट्रम्प की नीतियां और डेटा की कमी बाजार को गिराएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।