पश्चिमी अफ्रीका में मासूमों पर सीडीसी का ‘विवादित’ प्रयोग, आखिर इस स्टडी के पीछे छिपा है कौन सा गहरा राज?

सावधान! क्या नवजात शिशुओं की जान से हो रहा खिलवाड़? CDC ने विवादित वैक्सीन स्टडी के लिए दिए $1.6 मिलियन!

क्या आप सोच सकते हैं कि एक लाइफ-सेविंग वैक्सीन को नवजात बच्चों से दूर रखा जाए, सिर्फ एक प्रयोग के लिए? अमेरिका के Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के एक फैसले ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर अब ‘अनैतिक’ (Unethical) और खतरनाक बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, CDC ने चुपचाप एक डेनिश रिसर्च ग्रुप को $1.6 मिलियन (करोड़ों रुपये) का ग्रांट दिया है। यह ग्रुप पश्चिमी अफ्रीका (West Africa) के गिनी-बिसाऊ में हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis B) वैक्सीन पर एक स्टडी करने जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस रिसर्च ग्रुप के तार अमेरिका के ‘एंटी-वैक्सीन मूवमेंट’ से जुड़े बताए जा रहे हैं।

क्यों मचा है हड़कंप?

इस स्टडी का तरीका बेहद विवादित है। गिनी-बिसाऊ में होने वाले इस 5 साल के ट्रायल में, कुछ नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद वैक्सीन दी जाएगी, जबकि बाकी बच्चों को वैक्सीन के लिए 6 हफ्ते तक इंतज़ार करना पड़ेगा।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बेहद खतरनाक है। हेपेटाइटिस-बी लिवर फेलियर का कारण बन सकता है और गिनी-बिसाऊ में यह बीमारी बहुत आम है (लगभग 12% आबादी संक्रमित है)। ऐसे में जन्म के समय वैक्सीन न देना बच्चों की जान को जोखिम में डालने जैसा है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गैविन यामी ने इसे "पूरी तरह अनैतिक" करार दिया है।

RFK Jr. का कनेक्शन?

यह फैसला तब आया है जब रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर (RFK Jr.) ने स्वास्थ्य विभाग में अपना प्रभाव बढ़ाया है और वैक्सीन एडवाइजरी कमिटी में बदलाव किए हैं। कैनेडी लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि वैक्सीन्स का ‘प्लेसबो’ के खिलाफ टेस्ट होना चाहिए, और आलोचकों का मानना है कि यह स्टडी उसी एजेंडे का हिस्सा हो सकती है।

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जहाँ एक तरफ रिसर्चर्स इसे "अनोखा मौका" बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक्सपर्ट्स सवाल उठा रहे हैं: क्या विज्ञान के नाम पर बच्चों की सुरक्षा से समझौता करना सही है?

यह खबर Google Discover पर ट्रेंड कर रही है क्योंकि यह सीधे बच्चों की सेहत और वैक्सीन की नैतिकता से जुड़ी है।

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